मुजफ्फरपुर | बिहार का गौरव कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर की धरती आज सिसक रही है। शुक्रवार से जारी मूसलाधार बारिश, बर्फीली ओलावृष्टि और तेज आंधी ने जिले के किसानों की कमर तोड़ दी है। जो खेत कल तक हरियाली से लहलहा रहे थे, वे आज तबाही के मंजर पेश कर रहे हैं।
🧊 आसमान से बरसी ‘आफत’, जमींदोज हुई फसलें
मुजफ्फरपुर के मुशहरी, कांटी, कटरा, और बंदरा जैसे प्रखंडों में प्रकृति ने ऐसा तांडव मचाया कि किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई।
- गेहूं और मसूर: कटरा के खंगुरा इलाके में ओलावृष्टि ने गेहूं की खड़ी फसल को बिछा दिया है।
- आलू की बर्बादी: कांटी में आलू की खुदाई का समय था, लेकिन खेतों में जलजमाव के कारण फसल सड़ने लगी है।
- लीची का संकट: मुशहरी में लीची के मंजर (फूल) झड़ गए हैं, जिससे विश्वप्रसिद्ध ‘शाही लीची’ के उत्पादन पर खतरा मंडरा रहा है।

किसानों की व्यथा: “अब कैसे होगी बेटी की शादी?”
इस आपदा ने केवल फसल नहीं, बल्कि किसानों के सपनों को भी उजाड़ दिया है।
“5 बीघा गेहूं की फसल बर्बाद हो गई। उम्मीद थी कि इस बार अच्छी कमाई होगी तो बेटी के हाथ पीले करेंगे, लेकिन अब तो दाने-दाने की फिक्र सता रही है।” — रामा राय, स्थानीय किसान
वहीं, सुनील चौधरी जैसे छोटे किसान जिन्होंने खेती के लिए भारी ब्याज पर कर्ज लिया था, अब कर्ज के बोझ तले दबे महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, 4 बीघा खेती के लिए लिया गया 50 हजार का कर्ज अब डूब चुका है।
सरकार से गुहार: मुआवजे की मांग
जिले के किसानों में गहरा आक्रोश और निराशा है। किसान नेताओं और स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- तत्काल सर्वेक्षण: प्रखंड स्तर पर कृषि अधिकारियों द्वारा क्षति का आकलन किया जाए।
- उचित मुआवजा: प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ के आधार पर राहत राशि दी जाए।
- कर्ज माफी: जिन किसानों ने बैंक या साहूकारों से कर्ज लिया है, उन्हें राहत प्रदान की जाए।
⚠️ निष्कर्ष
मुजफ्फरपुर का किसान आज केवल बादलों की ओर टकटकी लगाए देख रहा है। यह समय केवल संवेदना व्यक्त करने का नहीं, बल्कि धरातल पर मदद पहुंचाने का है। अगर प्रशासन ने जल्द कदम नहीं उठाए, तो जिले में आर्थिक संकट और गहरा सकता है।
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