नई दिल्ली: भारत की सड़कों पर सफर करने का तरीका अब पूरी तरह बदलने वाला है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में भविष्य के टोल सिस्टम और सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़क हादसों में होने वाली मौतें किसी भी युद्ध से ज्यादा हैं, और इसे रोकने के लिए सरकार अब तकनीक का कड़ा पहरा लगाने जा रही है।

1. बिना रुके भरें टोल: 80 किमी/घंटा की रफ्तार पर होगी वसूली
सरकार 2026 तक देश में सैटेलाइट आधारित टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी में है।
- नो स्टॉपेज: अब आपको टोल बूथ पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। कारें 80 किमी/घंटा की रफ्तार से सीधे निकल सकेंगी।
- हाई-स्पीड कैमरे: टोल प्लाजा की जगह हाई-स्पीड कैमरे और AI आधारित सिस्टम लेंगे।
- ऑटोमैटिक भुगतान: कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट (ANPR) और FASTag को स्कैन करेंगे और टोल की राशि सीधे लिंक किए गए बैंक खाते से कट जाएगी।
2. ‘स्मार्ट’ चालान: तेज रफ्तार दिखाई तो खुद कटेगी रसीद
इस नई तकनीक का सबसे बड़ा डर उन लोगों के लिए होगा जो हाईवे पर ओवरस्पीडिंग करते हैं।
- टाइम कैलकुलेशन: यदि कोई गाड़ी दो टोल पॉइंट के बीच का सफर तय समय से जल्दी पूरा करती है, तो AI सिस्टम समझ जाएगा कि गाड़ी की रफ्तार औसत से अधिक थी।
- डिजिटल चालान: ओवरस्पीडिंग पकड़े जाने पर बिना किसी पुलिस हस्तक्षेप के अपने आप चालान जेनरेट हो जाएगा।

3. देश को क्या होगा फायदा?
इस बदलाव से सिर्फ समय ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक बचत भी होगी:
- ईंधन की बचत: गाड़ियों के न रुकने से करीब 1500 करोड़ रुपये का तेल बचेगा।
- सरकारी खजाना: सरकार के ‘रेनी डे फंड’ (आपातकालीन कोष) में लगभग 6000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होगी।
- प्रदूषण में कमी: टोल पर घंटों खड़े रहने से होने वाला कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
4. खराब सड़क दी तो ठेकेदार होंगे ब्लैकलिस्ट
सड़कों की क्वालिटी पर कड़ा रुख अपनाते हुए गडकरी ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर खराब काम करने वाले ठेकेदारों को अब 2 साल के लिए ब्लैकलिस्ट किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 70% शिकायतें राज्य या ग्रामीण सड़कों की होती हैं, जो केंद्र के अधीन नहीं आतीं।
नितिन गडकरी का संदेश: “सड़क हादसों में होने वाली मौतें युद्ध से भी बड़ी त्रासदी हैं। तकनीक के माध्यम से हम न केवल सफर को आसान बनाएंगे, बल्कि लोगों की जान भी बचाएंगे।”
- तकनीक सैटेलाइट (GNSS) और AI एनालिटिक्स
- स्कैनिंग ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR)
- रफ्तार 80 किमी/घंटा तक की गति पर स्कैनिंग संभव
- डेडलाइन वर्ष 2026 तक पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य