भारतीय क्रिकेट फैंस के लिए सुबह की शुरुआत एक मिली-जुली खबर के साथ हुई। टीम इंडिया के स्टार ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर ने बेंगलुरु के ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ (CoE) में नेट्स पर वापसी कर ली है। वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट से पहले यह खबर किसी संजीवनी से कम नहीं है, लेकिन क्या सुंदर पूरी तरह तैयार हैं? यह सवाल अब भी बरकरार है।
इंजरी अपडेट: क्या है पसली का पेच?
सुंदर की चोट जितनी साधारण दिख रही थी, उतनी थी नहीं। जिसे शुरुआत में ‘साइड स्ट्रेन’ समझा जा रहा था, बाद में मेडिकल जांच में वह ‘हल्का फ्रैक्चर’ निकला।
- मौजूदा स्थिति: सुंदर बल्लेबाजी तो कर रहे हैं, लेकिन पसली के पास अब भी हल्का खिंचाव और दर्द महसूस हो रहा है।
- मेडिकल बुलेटिन: बीसीसीआई की मेडिकल टीम ‘नो रिस्क’ पॉलिसी पर काम कर रही है। सुंदर को ‘रिटर्न टू प्ले’ प्रोटोकॉल से गुजरना होगा।

वर्ल्ड कप 2026 की रणनीति और सुंदर का रोल
कोच गौतम गंभीर और कप्तान सूर्यकुमार यादव के लिए सुंदर महज एक खिलाड़ी नहीं, बल्कि एक ‘टैक्टिकल वेपन’ हैं।
- पावरप्ले का जादूगर: सुंदर उन चुनिंदा स्पिनरों में से हैं जो शुरुआती 6 ओवरों में विकेट चटकाने और रन रोकने की क्षमता रखते हैं।
- लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन: विपक्षी टीमों के बाएं हाथ के बल्लेबाजों के खिलाफ सुंदर की ऑफ-स्पिन भारत का सबसे बड़ा हथियार है।
- बल्लेबाजी की गहराई: निचले क्रम में आकर तेजी से रन बनाना उन्हें एक संपूर्ण ऑलराउंडर बनाता है।
विकल्पों की तलाश: क्या है प्लान B?
अगर 7 फरवरी के पहले मैच तक सुंदर फिट नहीं होते, तो भारत के पास विकल्पों की भारी कमी है।
- टीम में फिलहाल कोई दूसरा ऐसा ऑफ-स्पिन ऑलराउंडर नहीं है जो सुंदर की जगह ले सके।
- मैनेजमेंट कुछ युवा चेहरों को देख रहा है, लेकिन अनुभव के मामले में सुंदर की कमी खलना तय है।
बड़ा सवाल: 7 फरवरी को क्या होगा?
वर्ल्ड कप के पहले मैच में सुंदर का खेलना अब भी 50-50 माना जा रहा है। फरवरी के पहले हफ्ते में होने वाला फिटनेस टेस्ट ही यह तय करेगा कि वह नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे या उन्हें अभी और इंतजार करना होगा।
निष्कर्ष (The Verdict)
वाशिंगटन सुंदर का फिट होना भारत के वर्ल्ड कप अभियान के लिए सबसे बड़ी जरूरत है। अगर वह फिट होते हैं, तो टीम इंडिया का संतुलन दुनिया में सबसे बेहतरीन होगा। लेकिन अगर वह चूकते हैं, तो गौतम गंभीर को अपनी पूरी रणनीति दोबारा बदलनी पड़ सकती है।