भारत में डिजिटल पहचान की परिभाषा बदलने वाली संस्था, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने कल नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक भव्य समारोह में अपना सबसे उन्नत ‘आधार ऐप’ लॉन्च किया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की गरिमामयी उपस्थिति में शुरू हुआ यह ऐप न केवल पुराने ‘m-Aadhaar’ की जगह लेगा, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुँचने का एकमात्र डिजिटल गेटवे बनने की क्षमता रखता है।
आधार सेंटर के चक्करों से मुक्ति: एक नए युग की शुरुआत
पिछले एक दशक में, आधार कार्ड में सुधार (Correction) करवाना आम जनता के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। बैंक, पोस्ट ऑफिस या आधार केंद्रों के बाहर लंबी कतारें और अपॉइंटमेंट की समस्या अब बीते कल की बात होने वाली है।
मोबाइल नंबर और एड्रेस अपडेट अब उंगलियों पर
नए ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसका Self-Service Update Portal (SSUP) है। अब नागरिक:
- मोबाइल नंबर लिंकिंग: चेहरे के प्रमाणीकरण (Face Auth) के जरिए घर बैठे अपना नया नंबर लिंक कर सकेंगे।
- पता परिवर्तन: डिजिटल रेंटल एग्रीमेंट या राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को सीधे स्कैन करके अपलोड करने की सुविधा।
- दस्तावेज़ अपडेट: UIDAI ने जो हर 10 साल में डॉक्यूमेंट अपडेट करने का नियम बनाया है, उसे अब ऐप के जरिए ‘जीरो कॉस्ट’ पर किया जा सकेगा।

‘प्रोफाइल शेयरिंग’ और ‘प्राइवेसी’ का अनोखा संगम
अक्सर प्राइवेसी के पैरोकार यह सवाल उठाते थे कि होटल या सिम कार्ड की दुकान पर पूरा आधार डेटा क्यों दिया जाए? 2026 के इस नए ऐप ने इसका समाधान ‘Selective Share’ के रूप में दिया है।
सुरक्षा का अभेद्य किला: बायोमेट्रिक और फेस लॉक
डिजिटल फ्रॉड के बढ़ते मामलों को देखते हुए, UIDAI ने सुरक्षा को ‘थ्री-लेयर सिक्योरिटी’ में बदल दिया है।
- बायोमेट्रिक लॉक/अनलॉक: आप अपने फिंगरप्रिंट को ऐप के जरिए हमेशा के लिए लॉक रख सकते हैं। जब आपको बैंक में अंगूठा लगाना हो, तभी उसे 10 मिनट के लिए अनलॉक करें। इसके बाद वह स्वतः लॉक हो जाएगा।
- AI-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन: ऐप अब आपकी लाइव फोटो के जरिए आपकी पहचान सुनिश्चित करता है, जिससे फोटो की फोटो दिखाकर धोखाधड़ी करना नामुमकिन है।
वन-डिवाइस, वन-फैमिली: परिवार का डिजिटल मैनेजर
भारतीय समाज की जरूरतों को समझते हुए, ऐप में एक ही फोन पर 5 सदस्यों के आधार कार्ड रखने की सुविधा दी गई है। यह सुविधा विशेष रूप से उन लोगों के लिए वरदान है जिनके घर में बुजुर्ग या छोटे बच्चे हैं। अब ट्रेन यात्रा के दौरान या अस्पताल में भर्ती होते समय आपको फिजिकल कार्ड ढूंढने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

ऑफलाइन वेरिफिकेशन: बिना इंटरनेट के भी होगा काम
भारत के ग्रामीण इलाकों या कमजोर नेटवर्क वाले क्षेत्रों के लिए ‘ऑफलाइन QR’ फीचर को अपग्रेड किया गया है।
- डिजिटल सिग्नेचर: ऐप में मौजूद QR कोड में डिजिटल हस्ताक्षर होते हैं।
- वैधता: इसे एयरपोर्ट्स और सुरक्षा जांच चौकियों पर मूल आधार कार्ड के समान ही दर्जा प्राप्त है।
- 13 भाषाओं का समर्थन: भाषाई बाधा को खत्म करते हुए इसे क्षेत्रीय भाषाओं में भी सहज बनाया गया है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह
तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐप ‘सुपर ऐप’ बनने की दिशा में पहला कदम है। आने वाले समय में इसे डिजी लॉकर (DigiLocker) और UPI के साथ और अधिक गहराई से जोड़ा जा सकता है।
“हमारा लक्ष्य केवल एक ऐप देना नहीं, बल्कि नागरिक को सशक्त बनाना है ताकि उसे अपनी पहचान प्रमाणित करने के लिए किसी बाबू या दफ्तर पर निर्भर न रहना पड़े।” – UIDAI प्रवक्ता
डिजिटल इंडिया 2.0
2026 का यह नया आधार ऐप भारत की ‘पेपरलेस’ इकोनॉमी के सपने को हकीकत में बदलने वाला टूल है। यह न केवल समय की बचत करेगा, बल्कि भ्रष्टाचार और बिचौलियों के नेटवर्क को भी पूरी तरह खत्म कर देगा।
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