मुजफ्फरपुर। उत्तर बिहार समेत पूरा प्रदेश इस वक्त भीषण शीतलहर और ‘कोल्ड डे’ (Cold Day) की चपेट में है। मौसम के मिजाज ने इस साल न केवल पिछले 10 वर्षों का रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है, बल्कि बुजुर्गों और मौसम वैज्ञानिकों को 23 साल पुराने उस दौर की याद दिला दी है, जब साल 2002 में दिसंबर के महीने ने इसी तरह अपना रौद्र रूप दिखाया था।
1. 23 साल पुराना इतिहास दोहरा रहा है मौसम
मौसम विभाग के आंकड़ों और वरिष्ठ मौसम विज्ञानी डॉ. ए. सत्तार के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान स्थिति की तुलना सीधे तौर पर दिसंबर 2002 से की जा रही है। उस वर्ष भी 15 दिसंबर के बाद से ही हाड़ कंपाने वाली ठंड का सिलसिला शुरू हुआ था, जो पूरे जनवरी महीने तक जारी रहा था।
ठीक उसी तरह, इस वर्ष भी 15 दिसंबर के बाद से पारा लगातार गिर रहा है। पिछले एक सप्ताह से सूरज के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। पांच दिन पहले हल्की धूप खिली थी, लेकिन वह भी कनकनी को कम करने में नाकाम रही। विशेषज्ञों का मानना है कि इस साल की ठंड केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि वायुमंडलीय बदलावों का एक बड़ा संकेत है।

2. तापमान का गणित: टूटा 10-12 वर्षों का रिकॉर्ड
सोमवार का दिन मुजफ्फरपुर के इतिहास में सबसे ठंडे दिनों में दर्ज किया गया। अधिकतम तापमान गिरकर 13.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने पिछले 10-12 वर्षों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
- तुलनात्मक अध्ययन: इससे पहले 29 दिसंबर 2014 को अधिकतम तापमान 14 डिग्री दर्ज किया गया था।
- दशक का सबसे कम तापमान: यदि हम पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें (जैसा कि नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट है), तो 2024 और 2023 के मुकाबले इस साल के अधिकतम तापमान में लगभग 10 से 12 डिग्री की भारी गिरावट आई है।
पिछले 10 वर्षों के तापमान पर एक नजर (29-30 दिसंबर के आसपास):
वर्ष. अधिकतम तापमान न्यूनतम तापमान
2025 13.8 9.8
2024 24.2 12.6
2023 25.4 10.7
2022 18.5 6.4
2021 19.4 14.9
2020 23 8.1
2019 14.4 6.5
2018 21 5
2017 16.4 9.4
2016 19.2 8.5

3. क्यों पड़ रही है इतनी भीषण ठंड? (वैज्ञानिक कारण)
इस वर्ष ठंड के इस कदर आक्रामक होने के पीछे मौसम वैज्ञानिकों ने दो मुख्य कारण बताए हैं:
1. जेट स्ट्रीम का प्रभाव: वायुमंडल के ऊपरी हिस्से में चलने वाली तीव्र हवाएं जिन्हें ‘जेट स्ट्रीम’ कहा जाता है, वे नीचे की ओर उतर रही हैं। ये हवाएं उत्तर (हिमालयी क्षेत्रों) से आकर दक्षिण की ओर प्रवेश कर रही हैं, जिससे मैदानी इलाकों में कनकनी बढ़ गई है।
2. मानसून के बाद की बारिश और नमी: इस वर्ष मानसून की विदाई के बाद भी काफी समय तक बारिश हुई। मिट्टी और वायुमंडल में अत्यधिक नमी (Humidity) मौजूद है। जब नमी ज्यादा होती है, तो कोहरा (Fog) घना होता है और धूप की किरणें धरातल तक नहीं पहुंच पातीं। यही कारण है कि ‘डे-वार्मिंग’ नहीं हो पा रही है और दिन का तापमान गिर रहा है।
4. जनजीवन अस्त-व्यस्त: सड़कों पर सन्नाटा और अलाव का सहारा
कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने आम जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।
- परिवहन पर असर: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण एनएच-28 और एनएच-57 जैसे प्रमुख मार्गों पर वाहनों की रफ्तार धीमी हो गई है। ट्रेनें और बसें अपने निर्धारित समय से घंटों देरी से चल रही हैं।
- बाजार की स्थिति: शाम ढलते ही बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है। लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। शहर के प्रमुख चौराहों जैसे कि कच्ची सराय, इमलीचट्टी और बैरिया में लोग सार्वजनिक अलाव के सहारे रात काटते नजर आ रहे हैं।
5. नए साल में राहत के आसार नहीं
मौसम विभाग की भविष्यवाणी उन लोगों के लिए चिंताजनक है जो नए साल के जश्न की योजना बना रहे हैं। डॉ. ए. सत्तार के अनुसार, आने वाले एक सप्ताह तक ठंड से राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। पछिया हवाओं का चलना जारी रहेगा, जिससे ‘विंड चिल फैक्टर’ बढ़ेगा और महसूस होने वाली ठंड वास्तविक तापमान से भी अधिक होगी।

6. स्वास्थ्य एवं सतर्कता संबंधी सुझाव
प्रशासन और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
- हृदय और श्वास रोगी: अचानक तापमान गिरने से रक्तचाप (BP) बढ़ सकता है, इसलिए बुजुर्ग और हृदय रोगी सुबह की सैर से बचें।
- बच्चों की देखभाल: छोटे बच्चों को गर्म कपड़ों की कई परतों में रखें और उन्हें ठंडी हवा के सीधे संपर्क में न आने दें।
- खान-पान: शरीर को अंदर से गर्म रखने के लिए गुनगुने पानी, सूप और गुड़ का सेवन करें।
मुजफ्फरपुर और आसपास के जिलों के लिए यह समय कठिन है। 2002 जैसी स्थिति यह याद दिलाती है कि प्रकृति का चक्र खुद को दोहराता है। जब तक जेट स्ट्रीम की स्थिति में बदलाव नहीं होता और पछिया हवा शांत नहीं होती, तब तक बिहारवासियों को इस ‘कोल्ड डे’ की स्थिति से जूझना होगा।