मुजफ्फरपुर। केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण निषाद ने कांग्रेस पार्टी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि विपक्षी दल को ‘राम’ के नाम से नफरत है, जबकि महात्मा गांधी का पूरा जीवन और उनके अंतिम शब्द भी ‘हे राम’ ही थे। मुजफ्फरपुर के एक स्थानीय होटल में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान डॉ. निषाद ने ग्रामीण विकास के नए खाके और रोजगार गारंटी विधेयक की बारीकियों को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि मोदी सरकार प्रतीकों की राजनीति के बजाय ठोस परिणाम देने में विश्वास रखती है।
कांग्रेस की मानसिकता और ‘राम’ का विरोध
डॉ. निषाद ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा, “यह विडंबना है कि जो कांग्रेस खुद को गांधी की विरासत का वाहक बताती है, उसे राम का नाम सुनते ही परेशानी होने लगती है। महात्मा गांधी ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ के माध्यम से राम राज्य की परिकल्पना की थी। आज जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उसी राम राज्य की अवधारणा को धरातल पर उतारने का प्रयास कर रहे हैं, तो कांग्रेस जनभावनाओं को भड़काने के लिए धरना-प्रदर्शन का सहारा ले रही है।”

नया रोजगार विधेयक: 125 दिन की गारंटी और बढ़ा हुआ बजट
केंद्रीय मंत्री ने नई रोजगार योजना (संशोधित ढांचे) की घोषणा करते हुए इसे ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प से जोड़ा। उन्होंने इसके मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
- बढ़ी हुई कार्य अवधि: अब हर ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिन का वेतनयुक्त रोजगार मिलेगा (जो पहले 100 दिन था)।
- जनजातीय सशक्तिकरण: वन क्षेत्रों में काम करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) के कामगारों के लिए 25 दिन के अतिरिक्त रोजगार का प्रावधान किया गया है।
- पारिश्रमिक में तेजी: नई तकनीक के माध्यम से मजदूरों के वेतन का भुगतान पहले के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से सीधा उनके खातों (DBT) में होगा।
- वित्तीय प्रावधान: इस योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है, जो इसकी गंभीरता को दर्शाता है।
नामकरण की राजनीति और गांधी परिवार पर प्रहार
इतिहास का हवाला देते हुए डॉ. निषाद ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा योजनाओं को केवल एक परिवार के नाम तक सीमित रखा। उन्होंने तुलनात्मक तथ्य पेश किए:
- NREGA का इतिहास: 1980 में इंदिरा गांधी ने योजनाओं को मिलाकर ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम’ बनाया, जिसे राजीव गांधी ने ‘जवाहर रोजगार योजना’ नाम दिया। सोनिया-मनमोहन सरकार ने इसे NREGA और फिर MNREGA किया।
- नाम परिवर्तन: जब कांग्रेस ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला, तब वह नेहरू जी का अपमान नहीं था? फिर आज सुधारों पर आपत्ति क्यों?
- आवास और बिजली: इंदिरा आवास योजना और राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना जैसी 600 से अधिक योजनाओं और संस्थानों का नाम केवल एक परिवार पर रखा गया।
- खेल रत्न: खेल में बिना किसी योगदान के खेल रत्न पुरस्कार का नाम राजीव गांधी के नाम पर रखा गया था, जिसे मोदी सरकार ने जनभावनाओं के अनुरूप बदला।
“प्रधानमंत्री मोदी ने किसी योजना का नाम अपने नाम पर नहीं रखा, बल्कि हर योजना को ‘सेवा’ और ‘अंत्योदय’ के लक्ष्य से जोड़ा है।” — डॉ. राजभूषण निषाद

ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर: 2005 बनाम 2025
मंत्री ने आंकड़ों के जरिए बताया कि क्यों पुराने ‘मनरेगा’ मॉडल में बदलाव जरूरी था:
- गरीबी में गिरावट: 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7% थी, जो 2023-24 में घटकर मात्र 4.86% रह गई है।
- पारदर्शिता: कांग्रेस के समय मनरेगा घोटालों का पर्याय थी। अब AI-आधारित फ्रॉड डिटेक्शन, GPS, और रियल-टाइम डेटा के माध्यम से भ्रष्टाचार पर लगाम कसी गई है।
- आजीविका विविधता: आज का ग्रामीण युवा केवल गड्ढे खोदने तक सीमित नहीं रहना चाहता, उसे कौशल और बेहतर कनेक्टिविटी चाहिए।
बिहार की राजनीति और विपक्ष की स्थिति
बिहार के राजनीतिक परिदृश्य पर चुटकी लेते हुए डॉ. निषाद ने कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। जनता ने उन्हें पहले ही चुनाव में आईना दिखा दिया है। उनके पास अब केवल उतनी सीटें हैं कि उनके विधायक एक ‘फोर-व्हीलर’ गाड़ी में समा जाएं। जनता विकास देख रही है और वह अब भटकावे में आने वाली नहीं है।
उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में भाजपा के प्रदेश मीडिया सह-प्रभारी प्रभात मालाकार, धानुका के अनुपम पाल, सुधीर शर्मा, डॉ. चक्रवर्ती, साकेत शुभम, राकेश पटेल सहित कई गणमान्य नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।