भारतीय क्रिकेट के लिए साल 2025 का अंत एक बड़े विवाद और चर्चा के साथ हो रहा है। टीम इंडिया के दो सबसे बड़े सुपरस्टार, रोहित शर्मा और विराट कोहली, अब अपने करियर के उस मोड़ पर हैं जहाँ वे चुनिंदा क्रिकेट खेल रहे हैं। लेकिन उनकी कमाई और मैदान पर उनकी मौजूदगी के बीच का फासला अब आंकड़ों में साफ नजर आने लगा है।
1. आंकड़ों का खेल: ₹50 लाख प्रति मैच?
BCCI के सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट 2024-25 के अनुसार, रोहित शर्मा और विराट कोहली A+ कैटेगरी में हैं, जिसकी सालाना रिटेनर फीस 7 करोड़ रुपये है। साल 2025 के अंत तक के आंकड़े बताते हैं:
- रोहित शर्मा: पूरे साल में कुल 14 वनडे मैच खेले। यानी ₹7 करोड़ / 14 मैच = ₹50 लाख प्रति मैच (सिर्फ रिटेनर फीस के आधार पर)।
- विराट कोहली: 1 टेस्ट और 13 वनडे (कुल 14 मैच) खेले। इनकी भी औसत लागत करीब ₹50 लाख प्रति मैच रही।
हैरानी की बात यह है कि ये दिग्गज खिलाड़ी साल में मुश्किल से 14 से 16 दिन मैदान पर रहे और ₹7 करोड़ की राशि के हकदार बने। यह राशि उनकी मैच फीस और विज्ञापन की कमाई से अलग है।

2. युवा ब्रिगेड: कम कमाई, ज्यादा काम (Workload)
एक तरफ जहाँ सीनियर खिलाड़ी ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ के नाम पर आराम कर रहे हैं, वहीं युवा खिलाड़ी टीम का बोझ उठाए हुए हैं।
शुभमन गिल ने रोहित-कोहली से दोगुने से भी ज्यादा मैच खेले और उनसे कहीं ज्यादा समय मैदान पर बिताया, लेकिन उनकी सैलरी इन दिग्गजों से ₹2 करोड़ कम रही। यह विरोधाभास बीसीसीआई के भीतर आंतरिक असंतोष का कारण बन सकता है।
3. रविंद्र जडेजा: A+ कैटेगरी का असली ‘योद्धा’
A+ कैटेगरी में रविंद्र जडेजा एक अपवाद बनकर उभरे हैं। उन्होंने साल 2025 में 20 मैच खेले, जिसमें 10 टेस्ट शामिल थे। टेस्ट क्रिकेट की थकान और समय को देखते हुए जडेजा ने करीब 60 दिन मैदान पर बिताए। यह रोहित और विराट के योगदान से लगभग चार गुना ज्यादा समय है, जो यह दर्शाता है कि A+ ग्रेड में रहने के बावजूद जडेजा अपना पूरा पैसा ‘वसूल’ कर रहे हैं।

4. ग्लोबल मॉडल से तुलना: क्या भारत पिछड़ रहा है?
दुनिया के अन्य बड़े क्रिकेट बोर्ड्स ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है:
- इंग्लैंड (ECB): यहाँ ‘मल्टी-ईयर’ और ‘फॉर्मेट आधारित’ कॉन्ट्रैक्ट है। जो खिलाड़ी तीनों फॉर्मेट खेलता है, उसे सबसे अधिक भुगतान मिलता है।
- ऑस्ट्रेलिया (CA): यहाँ ‘अपग्रेड पॉइंट्स’ सिस्टम है। आप जितने मैच खेलेंगे, उतने पॉइंट्स मिलेंगे और आपकी सैलरी बढ़ती जाएगी। यहाँ टेस्ट क्रिकेट खेलने वालों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जाती है।
- न्यूजीलैंड (NZC): यहाँ नियम सख्त है—”उपलब्धता नहीं तो अनुबंध नहीं।”
5. बीसीसीआई के सामने चुनौतियां
रोहित और विराट का कद भारतीय क्रिकेट में इतना बड़ा है कि उन्हें नीचे की कैटेगरी में डालना बोर्ड के लिए एक बड़ा ‘पॉलिटिकल’ और ‘इमोशनल’ रिस्क हो सकता है। लेकिन 2025 के आंकड़े यह सवाल उठाते हैं:
- क्या ग्रेडिंग सिस्टम सिर्फ नाम पर आधारित है?
- क्या प्रदर्शन और मैदान पर बिताए गए समय की कोई कीमत नहीं है?
- क्या इससे युवाओं में निराशा पैदा होगी?
निष्कर्ष
बीसीसीआई का मौजूदा मॉडल “ब्रांड वैल्यू” और “सीनियारिटी” को सम्मान देता है, लेकिन आधुनिक क्रिकेट के बढ़ते वर्कलोड को देखते हुए इसमें बदलाव की जरूरत महसूस हो रही है। यदि कोई खिलाड़ी केवल एक फॉर्मेट खेल रहा है, तो क्या उसे ‘ऑल-फॉर्मेट’ कैटेगरी (A+) में रखना सही है?
आने वाले समय में, बीसीसीआई को शायद ‘पे-पर-मैच’ या ‘फॉर्मेट-स्पेसिफिक रिटेनर’ मॉडल पर विचार करना पड़े ताकि शुभमन गिल और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों के साथ न्याय हो सके।
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