बेंगलुरु: घरेलू क्रिकेट के गलियारों में आज एक ऐसा मुकाबला खेला गया जिसे दशकों तक याद रखा जाएगा। विजय हजारे ट्रॉफी (या घरेलू वनडे टूर्नामेंट) के एक हाई-वोल्टेज मुकाबले में झारखंड और कर्नाटक के बीच रनों की जो बारिश हुई, उसने क्रिकेट प्रेमियों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया। ईशान किशन की आतिशी शतकीय पारी पर कर्नाटक के बल्लेबाजों का सामूहिक प्रहार भारी पड़ा और अंततः कर्नाटक ने वनडे क्रिकेट के इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा रन-चेज सफलतापूर्वक पूरा कर इतिहास रच दिया।
ईशान किशन का ‘ईशान’ कोण: चौके-छक्कों की बारिश
मैच की शुरुआत में टॉस जीतकर झारखंड ने पहले बल्लेबाजी करने का निर्णय लिया। झारखंड के सलामी बल्लेबाज और भारतीय टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ईशान किशन आज अलग ही मूड में नजर आ रहे थे। उन्होंने मैदान के चारों ओर शॉट्स लगाए और कर्नाटक के अनुभवी गेंदबाजों को असहाय कर दिया।
विस्फोटक शुरुआत: ईशान ने मात्र 35 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया।

शतकीय प्रहार:
उन्होंने अपनी पारी को आगे बढ़ाते हुए महज 90 गेंदों में अपना शतक पूरा किया। उनकी पारी में 12 गगनचुंबी छक्के और 15 शानदार चौके शामिल थे।
झारखंड का विशाल स्कोर: ईशान किशन की 170 रनों की विशाल व्यक्तिगत पारी और मध्यक्रम में अन्य बल्लेबाजों के छोटे लेकिन उपयोगी योगदान की मदद से झारखंड ने निर्धारित 50 ओवरों में 420 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर खड़ा किया।
कर्नाटक की ऐतिहासिक जवाबी कार्रवाई
421 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी कर्नाटक की टीम के सामने पहाड़ जैसी चुनौती थी। क्रिकेट इतिहास में इतने बड़े लक्ष्य बहुत कम ही हासिल किए गए हैं। लेकिन कर्नाटक के बल्लेबाजों के इरादे कुछ और ही थे।
सलामी जोड़ी ने फूंका जोश
कर्नाटक के सलामी बल्लेबाजों ने पहले ओवर से ही झारखंड के गेंदबाजों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। पावरप्ले में कर्नाटक ने बिना किसी नुकसान के 90 रन जोड़कर यह संकेत दे दिया था कि वे हार मानने वाले नहीं हैं।
मध्यक्रम का गजब का जज्बा
सलामी बल्लेबाजों के आउट होने के बाद मैच एक समय फंसता हुआ नजर आ रहा था, लेकिन कर्नाटक के मध्यक्रम ने जिम्मेदारी संभाली। टीम के कप्तान और युवा प्रतिभावान खिलाड़ियों के बीच हुई 150 रनों की साझेदारी ने मैच का पासा पलट दिया।
पारी की मुख्य विशेषताएं:
ओपनिंग पार्टनरशिप: 110 रन (12 ओवर)
मिडल ऑर्डर स्ट्राइक रेट: 145.00 से अधिक
अंतिम 5 ओवरों की जरूरत: 60 रन
रोमांचक अंतिम ओवर:
सांसें रोक देने वाला अंत
मैच के आखिरी 10 ओवरों में मुकाबला पूरी तरह से रोमांचक मोड़ पर था। झारखंड के गेंदबाजों ने वापसी की कोशिश की और कुछ महत्वपूर्ण विकेट चटकाए, लेकिन कर्नाटक की गहराई और निचले क्रम की बल्लेबाजी ने हार नहीं मानी।
अंतिम ओवर में जीत के लिए 12 रनों की दरकार थी। झारखंड की ओर से उनके मुख्य तेज गेंदबाज गेंदबाजी कर रहे थे। पहली तीन गेंदों पर केवल 4 रन आए, लेकिन चौथी गेंद पर लगे एक शानदार छक्के ने कर्नाटक को जीत की दहलीज पर खड़ा कर दिया। अगली गेंद पर दो रन लेकर कर्नाटक ने वनडे क्रिकेट इतिहास का दूसरा सबसे बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया।
हार के बाद भी चर्चा में ईशान किशन
भले ही झारखंड यह मैच हार गया, लेकिन ईशान किशन की पारी ने चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उनकी बल्लेबाजी में वह पुरानिष्कर्षनी आक्रामकता और आत्मविश्वास नजर आया, जिसके लिए उन्हें जाना जाता है। सोशल मीडिया पर क्रिकेट फैंस ईशान की इस पारी को उनकी वापसी का संकेत मान रहे हैं।
यह मैच केवल हार और जीत का नहीं था, बल्कि यह कौशल, धैर्य और मानसिक मजबूती का प्रदर्शन था। जहाँ एक तरफ ईशान किशन ने अपनी बल्लेबाजी से दिल जीता, वहीं कर्नाटक ने अपनी टीम भावना से इतिहास रच दिया।
निष्कर्ष
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-स्कोरिंग मैच भारतीय घरेलू क्रिकेट के बढ़ते स्तर को दर्शाते हैं। कर्नाटक की इस जीत ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक क्रिकेट में अब कोई भी लक्ष्य “असंभव” नहीं रह गया है।