मुख्य बिंदु:
- ASP अभिनव के नेतृत्व में एसआईटी (SIT) की कड़ी कार्रवाई।
- प्रभात मेमोरियल अस्पताल के बाहर भारी जन-आक्रोश, ‘अस्पताल बंद करो’ के नारे।
- डॉ. सतीश के बयानों में विरोधाभास, पुलिस खंगाल रही है कॉल डिटेल्स।
- पीड़ित परिवार का आरोप- “यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं।”
1. घटना का विवरण और ताजा घटनाक्रम
शहर के प्रतिष्ठित प्रभात मेमोरियल अस्पताल में एक NEET परीक्षार्थी (छात्रा) के साथ हुई दरिंदगी और उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। आज इस मामले में सबसे बड़ी कार्रवाई तब देखने को मिली जब अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सतीश को हिरासत में लेकर ASP अभिनव के दफ्तर में करीब 12 घंटे तक कड़ी पूछताछ की गई।
सुबह 10 बजे जब डॉ. सतीश को पुलिस वाहन में एएसपी कार्यालय लाया गया, तो वहां पहले से मौजूद प्रदर्शनकारियों ने उनकी गाड़ी को घेरने का प्रयास किया। पुलिस को प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

2. एएसपी कार्यालय में 12 घंटे का घटनाक्रम
ASP अभिनव की निगरानी में गठित विशेष टीम ने डॉ. सतीश से कई चरणों में सवाल किए। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के मुख्य बिंदु निम्नलिखित थे:
- घटना की रात की टाइमलाइन: डॉ. सतीश घटना वाली रात कहां थे और अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज में उनकी मौजूदगी के निशान क्यों गायब हैं?
- सीसीटीवी से छेड़छाड़: अस्पताल के बैकयार्ड और उस वार्ड के पास के कैमरे उस रात क्यों बंद थे, जहां छात्रा का शव मिला था?
- कर्मचारियों की भूमिका: क्या अस्पताल के अन्य स्टाफ सदस्य इस घिनौने कृत्य में शामिल थे या उन्होंने साक्ष्य छिपाने में मदद की?
ASP अभिनव का बयान: “हम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। डॉ. सतीश के बयानों में कई जगह विसंगतियां पाई गई हैं। हम फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रहे हैं। दोषी चाहे कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
3. प्रभात मेमोरियल अस्पताल के बाहर भारी प्रदर्शन
एक तरफ पुलिस पूछताछ कर रही थी, तो दूसरी तरफ प्रभात मेमोरियल अस्पताल के बाहर जनसैलाब उमड़ पड़ा। छात्र संगठनों, स्थानीय नागरिकों और कैंडल मार्च निकालने वाले लोगों ने अस्पताल के गेट पर ताला जड़ने की कोशिश की।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें:
- अस्पताल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
- मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो।
- पीड़ित परिवार को सुरक्षा और उचित मुआवजा दिया जाए।

गुस्साई भीड़ ने “अस्पताल बंद करो” और “हत्यारों को फांसी दो” के नारे लगाए। प्रदर्शन में शामिल एक छात्रा ने कहा, “अगर एक अस्पताल जैसी जगह पर भी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो हम कहां पढ़ने जाएं? यह सिर्फ एक रेप केस नहीं, बल्कि सिस्टम की विफलता है।”
4. पीड़ित परिवार का दर्द और न्याय की गुहार
मृतक छात्रा के पिता ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल ने शुरुआत में मामले को आत्महत्या बताने की कोशिश की थी। उन्होंने बताया, “मेरी बेटी डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती थी। वह मेहनत से पढ़ाई कर रही थी। अस्पताल प्रबंधन ने सबूतों को नष्ट करने की पूरी कोशिश की है।”
5. जांच के दायरे में अस्पताल का मैनेजमेंट
पुलिस ने अब अस्पताल के रिकॉर्ड्स और पिछले 6 महीनों के ज्वाइनिंग डेटा को भी जब्त कर लिया है। जांच इस बात की भी हो रही है कि क्या अस्पताल में पहले भी इस तरह की संदिग्ध घटनाएं हुई हैं जिन्हें दबा दिया गया।

6. सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज कर दी है। विपक्ष ने सरकार पर कानून व्यवस्था को लेकर कड़े प्रहार किए हैं। महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। सोशल मीडिया पर #JusticeForNEETStudent ट्रेंड कर रहा है, जिसमें लोग आरोपियों के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे हैं।
निष्कर्ष
यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना नहीं रह गया है, बल्कि यह चिकित्सा क्षेत्र की सुरक्षा और नैतिकता पर एक बड़ा सवालिया निशान है। जैसे-जैसे पूछताछ आगे बढ़ रही है, नए खुलासे होने की उम्मीद है। शहर की जनता की नजरें अब ASP अभिनव की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।