ढाका: बांग्लादेश क्रिकेट इस समय अपने सबसे बड़े प्रशासनिक संकट और बदलाव के दौर से गुजर रहा है। पिछले कुछ दिनों से बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच जारी ‘शीतयुद्ध’ अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने एक कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने कद्दावर निदेशक और वित्त समिति के अध्यक्ष एम. नजमुल इस्लाम को उनके पद से तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।
यह फैसला केवल एक प्रशासनिक फेरबदल नहीं है, बल्कि इसे बांग्लादेशी खिलाड़ियों की बोर्ड पर एक बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
1. बीसीबी का आधिकारिक बयान और संवैधानिक कार्रवाई
बोर्ड की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यह कदम संगठन के व्यापक हित में उठाया गया है। बयान में कहा गया:
“हालिया घटनाक्रमों की समीक्षा करने के बाद, बीसीबी अध्यक्ष ने यह निर्णय लिया है कि एम. नजमुल इस्लाम को वित्त समिति के अध्यक्ष पद की सभी जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाता है। यह निर्णय बीसीबी संविधान के अनुच्छेद 31 के तहत लिया गया है, ताकि बोर्ड का संचालन सुचारू और प्रभावी ढंग से हो सके।”

अगली सूचना तक वित्त समिति की कमान खुद बोर्ड अध्यक्ष संभालेंगे।
2. विवाद की जड़: क्या था वो ‘बयान’ जिसने आग लगाई?
एम. नजमुल इस्लाम अपनी सख्त छवि और विवादित बयानों के लिए जाने जाते रहे हैं, लेकिन हाल ही में टी20 वर्ल्ड कप 2026 को लेकर दिए गए उनके एक बयान ने सीमा लांघ दी थी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा था:
बयान: “अगर बांग्लादेश की टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 में नहीं खेलती है, तो इससे बोर्ड को कोई फर्क नहीं पड़ेगा। नुकसान सिर्फ खिलाड़ियों का होगा क्योंकि उन्हें पैसे नहीं मिलेंगे। बोर्ड किसी भी तरह का मुआवजा नहीं देगा।”
इस बयान को खिलाड़ियों ने न केवल अपमानजनक माना, बल्कि इसे राष्ट्रीय सम्मान और खिलाड़ियों के मनोबल पर सीधा हमला करार दिया।
3. खिलाड़ियों का मोर्चा: मोहम्मद मिथुन का कड़ा रुख
इस्लाम के बयानों के विरोध में क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश (CWAB) ने मोर्चा खोल दिया। सीनियर क्रिकेटर और खिलाड़ियों के प्रतिनिधि मोहम्मद मिथुन ने एक आपातकालीन ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने बेहद सख्त लहजे में कहा:
“एम. नजमुल इस्लाम के बयान अब बर्दाश्त की सीमा से बाहर हो चुके हैं। एक तरफ हम देश के लिए खून-पसीना बहाते हैं, और दूसरी तरफ बोर्ड के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग हमें वित्तीय नुकसान की धमकियां देते हैं। यह खिलाड़ियों के प्रति उनकी नफरत को दर्शाता है।”

4. बोर्ड के अंदर मची खलबली और हड़ताल की आहट
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नजमुल इस्लाम के फैसलों और रवैये के कारण बांग्लादेश के घरेलू खिलाड़ियों की स्थिति बदतर होती जा रही थी। खिलाड़ियों के मन में इतना असंतोष भर गया था कि उन्होंने गुप्त रूप से एक बड़ी हड़ताल की योजना बना ली थी। यदि बोर्ड समय रहते इस्लाम पर कार्रवाई नहीं करता, तो बांग्लादेशी क्रिकेट का पूरा ढांचा ठप पड़ सकता था।
एक नई शुरुआत की उम्मीद
नजमुल इस्लाम की छुट्टी के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि बोर्ड और खिलाड़ियों के बीच संवाद का एक नया और सकारात्मक रास्ता खुलेगा। हालांकि, वित्त समिति जैसे महत्वपूर्ण पद का खाली होना और अध्यक्ष द्वारा इसे संभालना एक अस्थायी समाधान है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि बीसीबी इस पद पर किसे नियुक्त करता है जो खिलाड़ियों और प्रशासन के बीच सेतु का काम कर सके।
अभी के लिए, यह बांग्लादेशी क्रिकेटर्स की एकता की एक बड़ी जीत है।