सुप्रीम कोर्ट की मुख्य बातें और निर्देश:
- चुप नहीं बैठेंगे: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि अदालत इस गंभीर स्वास्थ्य संकट पर चुप नहीं बैठ सकती और वह केवल सर्दियों के महीनों में ‘रस्मी’ सुनवाई नहीं करेगी।
- नियमित सुनवाई: कोर्ट ने निर्देश दिया कि अब प्रदूषण के मामले पर हर महीने कम से कम दो बार नियमित रूप से सुनवाई होगी ताकि अल्पकालिक और दीर्घकालिक समाधान खोजे जा सकें।
- ठोस प्लान की मांग: कोर्ट ने केंद्र सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से प्रदूषण से निपटने के लिए उठाए गए अल्पकालिक (Short-Term) और दीर्घकालिक (Long-Term) कदमों की एक विस्तृत और ठोस कार्ययोजना (Action Plan) पेश करने को कहा है।
- पराली पर रुख: सीजेआई ने पराली जलाने को अकेला कारण बताने पर सवाल उठाया, और कहा कि इसे राजनीतिक या अहंकार का मुद्दा नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड लॉकडाउन के दौरान भी पराली जल रही थी, लेकिन आसमान साफ था, जिसका मतलब है कि अन्य कारक भी जिम्मेदार हैं।
- अगली सुनवाई: मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 दिसंबर की तारीख तय की गई है।
कोर्ट की इस सख्ती का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रदूषण की समस्या को केवल एक मौसमी घटना मानकर टाल न दिया जाए, बल्कि इस पर साल भर लगातार काम हो।

इस सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम बेकार नहीं बैठ सकते, कोविड-19 के दौरान लोग नीला आकाश और तारे क्यों देख पाए? पराली जलाना प्रदूषण का सिर्फ एक स्रोत है l
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण मामले की सुनवाई के दौरान सख्त टिप्पणी की, कोर्ट ने कहा कि वो चुप नहीं बैठ सकते हैं, दिल्ली में प्रदूषण कम हो सकता है, हमने कोविड-19 के दौरान देखा कि कैसे आसमान पूरा साफ हो गया है. लोग दिल्ली में रहते हुए भी आसमान में बगैर किसी प्रदूषण के तारे तक देख पाते थे, सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि पराली जलाना तो प्रदूषण का एक कारण है, ये किसी के लिए राजनीतिक और अहम का कारण नहीं बनना चाहिए l

कोर्ट ने CAQM और सरकार से पूछा है कि प्रदूषण को कम करने के लिए उनका कोई प्लान भी है, सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि CAQM और प्राधिकारियों को कमर कसना चाहिए और दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या पर अंकुश लगाने के लिए उठाए गए कदमों पर विचार करना चाहिए l कोर्ट ने कहा कि प्रदूषण को कम करने के लिए जिस तरह से योजनाओं को चलाया जा रहा है उससे हम चिंतित हैं l
इस सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कहा कि हम बेकार नहीं बैठ सकते, कोविड-19 के दौरान लोग नीला आकाश और तारे क्यों देख पाए? उन्होंने कहा कि पराली जलाना प्रदूषण का सिर्फ एक स्रोत है, इसे राजनीतिक और अहंकार की लड़ाई नहीं बनना चाहिए, दिल्ली में प्रदूषण सिर्फ पराली जलाने के कारण नहीं है, हमें दिल्ली में प्रदूषण के अन्य कारणों को रोकने के लिए कदम उठाए l
सुनवाई के दौरान CAQM ने कोर्ट को बताया कि हमने हितधारकों से सलाह ली है, इसपर AASG ने कोर्ट से कहा कि हम सभी प्राधिकरणों-हरियाणा, पंजाब, सीपीसीबी आदि पर की गई कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल कर सकते हैं, फिर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम बेकार नहीं बैठ सकते, हम मान नहीं सकते या अनुमान नहीं लगा सकते, समाधान विशेषज्ञों से आना होगा. अदालतों के पास ऐसा हो भी सकता है और नहीं भी, लेकिन यह निश्चित रूप से सभी हितधारकों को बैठने और विचार-विमर्श करने के लिए एक मंच प्रदान कर सकता है l