नई दिल्ली/लंदन: आज 18 दिसंबर है। भारत के सबसे चर्चित ‘भगोड़े आर्थिक अपराधी’ विजय माल्या का जन्मदिन। 1955 में जन्मे माल्या आज 70 वर्ष के हो गए हैं। लेकिन भारत के लिए माल्या महज एक उद्योगपति नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की उस विफलता का चेहरा हैं, जो 17 बैंकों का 9,000 करोड़ रुपये डकार कर 9 साल से लंदन की गलियों में ऐश कर रहा है।
सवाल यह नहीं है कि माल्या कहाँ हैं, सवाल यह है कि भारत में संपत्तियां कुर्क होने के बावजूद माल्या का ‘शाही खर्च’ आखिर चल कैसे रहा है?

1. अदालती ‘कंगाली’ बनाम आलीशान हकीकत
ब्रिटिश कोर्ट में सुनवाई के दौरान माल्या ने कई बार खुद को ‘बेहद गरीब’ और ‘कंगाल’ बताया है। लेकिन हकीकत यह है कि वह आज भी लंदन के पास ‘लेडीवॉक’ जैसे आलीशान बंगले में रहते हैं।
कैसे बचता है पैसा?
- फैमिली ट्रस्ट का खेल: माल्या की अधिकांश वैश्विक संपत्तियां उनके नाम पर नहीं, बल्कि ‘फैमिली ट्रस्ट’ के नाम पर हैं। इनके कानूनी वारिस उनके बच्चे (सिद्धार्थ, लीया और तान्या) हैं। तकनीकी रूप से माल्या ‘खाली हाथ’ हैं, लेकिन ट्रस्ट की दौलत पर उनका कब्जा है।
- फंड डाइवर्जन: जांच एजेंसियों (ED और CBI) का मानना है कि कर्ज का एक बड़ा हिस्सा शेल कंपनियों के जरिए विदेशी खातों में भेजा गया था।
- कोर्ट से ‘पॉकेट मनी’: ब्रिटिश अदालत ने माल्या को उनके कानूनी खर्च और जीवनयापन के लिए जब्त फंड से हजारों पाउंड प्रति सप्ताह निकालने की छूट दे रखी है।

2. निजी जिंदगी: दो पत्नियां और एक वफादार पार्टनर
माल्या का रसूख सिर्फ बिजनेस तक सीमित नहीं रहा। उनकी निजी जिंदगी भी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
- समीरा और रेखा: पहली शादी एयर होस्टेस समीरा शर्मा से हुई, जिनसे बेटा सिद्धार्थ है। दूसरी शादी बचपन की दोस्त रेखा से हुई, जिनसे दो बेटियां हैं।
- पिंकी लालवानी: वर्तमान में माल्या लंदन में अपनी पार्टनर पिंकी लालवानी के साथ रहते हैं। किंगफिशर एयरलाइंस की पूर्व कर्मचारी पिंकी, माल्या के सबसे बुरे दौर में उनके साथ ढाल बनकर खड़ी रहीं। कोर्ट की पेशी हो या रेस कोर्स की पार्टी, पिंकी हमेशा उनके साथ नजर आती हैं।
3. ‘गुप्त’ कानूनी पेच में फंसा प्रत्यर्पण
भारत सरकार ने प्रत्यर्पण की कानूनी जंग जीत ली है। ब्रिटेन की सर्वोच्च अदालत ने भी हरी झंडी दे दी है। इसके बावजूद माल्या भारत की जेल में नहीं हैं।
कारण: एक ‘गुप्त कानूनी प्रक्रिया’। जानकारों का मानना है कि माल्या ने ‘राजनीतिक शरण’ (Asylum) की अर्जी लगा रखी है, जिसकी सुनवाई पूरी होने तक उन्हें भारत नहीं भेजा जा सकता।
निष्कर्ष
विजय माल्या की कहानी भारतीय बैंकिंग इतिहास का वो काला अध्याय है, जो बताता है कि कैसे एक रसूखदार व्यक्ति कानून की खामियों का फायदा उठाकर सात समंदर पार भी विलासिता का जीवन जी सकता है। जब तक वह भारत की अदालतों के सामने खड़े नहीं होते, तब तक ‘न्याय’ अधूरा ही रहेगा।