नगर निगम बोर्ड की बैठक में स्टालधारकों के संबंध में लिए गए, निर्णय के आलोक में कार्य शुरू कर दिया गया है। नगर निगम की ओर से शहर के सभी स्टालधारकों का सत्यापन करने के लिए चलाया जाएगा अभियान ।

शहर के हजारों फुटपाथ दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और स्टालधारकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। मुजफ्फरपुर में अब इन छोटे व्यापारियों को हर वक्त अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर उजाड़े जाने का डर नहीं सताएगा। जिला प्रशासन और नगर निगम ने स्टालधारकों को ‘कार्यकाल की कानूनी सुरक्षा’ (Security of Tenure) प्रदान करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया है।
यह पहल पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम, 2014 (Street Vendors Act, 2014) के प्रभावी कार्यान्वयन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शहर के असंगठित क्षेत्र के इन व्यापारियों को सम्मानजनक आजीविका का अधिकार देना है।
31 दिसंबर तक दस्तावेज जमा नहीं करने पर स्टाल का लाइसेंस रद भी किया जा सकता है। नगर निगम ने शहर के विभिन्न मार्केट में वर्षों से संचालित स्टाल के एकरारनामा नवीनीकरण, स्वामित्व सत्यापन और दस्तावेज अपडेट करने के लिए विशेष अभियान की शुरुआत कर दी है। निगम के अनुसार, यह कदम बाजार की व्यवस्था को पारदर्शी, सुव्यवस्थित, और रिकार्ड आधारित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

क्या है ‘कार्यकाल की कानूनी सुरक्षा’?
‘कार्यकाल की कानूनी सुरक्षा’ का सीधा अर्थ है कि एक बार प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, पंजीकृत स्टालधारकों को उनके निर्धारित स्थान से पुलिस या नगर निगम के अधिकारियों द्वारा मनमाने ढंग से या बिना किसी ठोस कारण और पूर्व सूचना के नहीं हटाया जा सकेगा। उन्हें एक निश्चित अवधि के लिए उस स्थान पर व्यवसाय करने का कानूनी अधिकार प्राप्त होगा।
कैसे लागू होगी यह व्यवस्था?
इस सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नगर निगम और टाउन वेंडिंग कमेटी (TVC) मिलकर एक चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाएंगे:
व्यापक सर्वेक्षण (Survey): सबसे पहले, पूरे शहर में मौजूदा स्टालधारकों और फुटपाथ दुकानदारों का एक विस्तृत सर्वेक्षण किया जाएगा।
पंजीकरण और पहचान पत्र: सर्वेक्षण में शामिल वास्तविक विक्रेताओं का पंजीकरण किया जाएगा और उन्हें नगर निगम द्वारा फोटोयुक्त पहचान पत्र जारी किए जाएंगे।
विक्रय प्रमाण पत्र (Vending Certificate): सबसे महत्वपूर्ण कदम के रूप में, पात्र स्टालधारकों को ‘विक्रय प्रमाण पत्र’ दिया जाएगा। यही वह दस्तावेज होगा जो उन्हें उनके कार्यकाल की कानूनी सुरक्षा की गारंटी देगा।
वेंडिंग ज़ोन का निर्धारण: शहर को व्यवस्थित करने के लिए ‘वेंडिंग ज़ोन’ (जहां दुकानें लगाई जा सकती हैं) और ‘नॉन-वेंडिंग ज़ोन’ (जहां दुकानें प्रतिबंधित होंगी, जैसे मुख्य चौराहों या अस्पतालों के पास) चिह्नित किए जाएंगे। पंजीकृत दुकानदारों को वेंडिंग ज़ोन में जगह आवंटित की जाएगी।
स्टालधारकों को होने वाले प्रमुख लाभ:
उत्पीड़न से मुक्ति: पहचान पत्र और प्रमाण पत्र होने से पुलिस या अन्य अधिकारियों द्वारा अनावश्यक पूछताछ या हफ्ता वसूली जैसे उत्पीड़न का डर खत्म होगा।
स्थायी आजीविका: एक निश्चित जगह मिलने से उनकी आय स्थिर होगी और वे अपने भविष्य की योजना बेहतर ढंग से बना सकेंगे।
सरकारी योजनाओं तक पहुंच: कानूनी मान्यता मिलने के बाद, ये स्टालधारक ‘पीएम स्वनिधि योजना’ (PM SVANidhi) जैसी सरकारी ऋण योजनाओं और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ आसानी से उठा सकेंगे।
प्रशासन का दृष्टिकोण
नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, इस कदम का उद्देश्य केवल दुकानदारों को सुरक्षा देना ही नहीं है, बल्कि शहर की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाना और अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान खोजना भी है। जब दुकानदारों को एक वैध जगह मिल जाएगी, तो वे सड़कों पर बेतरतीब ढंग से दुकानें नहीं लगाएंगे, जिससे शहर व्यवस्थित होगा।
यह निर्णय मुजफ्फरपुर के शहरी गरीबों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
दस्तावेज जमा कर जारी की गई तिथि
निगम मार्केट (स्टेशन रोड) : पांच और छह दिसंबर
जिला स्कूल बाजार : आठ और दस दिसंबर
जुब्बा सहनी बाजार : 11 और 13 दिसंबर
पक्की सराय बाजार : 15 और 16 दिसंबर
बैंक रोड बाजार : 17 और 19 दिसंबर
सदर अस्पताल बाजार : 20 एवं 22 दिसंबर
लक्ष्मी चौक बाजार : 23 और 24 दिसंबर
धर्मशाला चौक बाजार : 26 एवं 29 दिसंबर
अन्य मार्केट/छूटे स्टालधारक: 30 और 31 दिसंबर (अंतिम तिथि)
दस्तावेज की अनिवार्य सूची
स्टाल आवेदन पत्र एवं एकरारनामा/लीज की कापी
– आधार कार्ड, पैन कार्ड
– बैंक विवरण/स्टेटमेंट (एनपीसीआइ से लिंक समेत)
– अपडेट ट्रेड लाइसेंस
– स्वयं-घोषणा पत्र
– स्टाल किराया/बकाया का विवरण
– पासपोर्ट साइज फोटो
– ट्रांसफर/विरासत से संबंधित सहमति पत्र
– मोबाइल नंबर, वाट्सएप नंबर एवं ई-मेल आइडी
– उत्तराधिकार दस्तावेज/शपथ पत्र/एनओसी (यदि लागू हो)
– अधूरे दस्तावेज वाले आवेदन को अस्वीकृत माना जाएगा
यह अभियान स्टालधारकों के हित में है। ताकि आगे किसी प्रकार की कानूनी या प्रशासनिक समस्या नहीं आए। तय तिथियों का पालन करना आवश्यक है।
सत्यापन प्रक्रिया से मार्केट व्यवस्था मजबूत होगी और अनियमितताओं पर नियंत्रण लगेगा। इससे स्टालधारकों की स्थिति बेहतर होगी और उन्हें अधिक अधिकार मिलेगा
बाजारों में सुव्यवस्थित और पारदर्शी स्टाल संचालन सुनिश्चित करने के लिए सत्यापन अनिवार्य है। सभी स्टालधारकों से अपेक्षा है कि वे निर्धारित तिथियों में अपने दस्तावेज जमा करें।