मुफ़्त सेवा और मुनाफे का रहस्य :-
आज भारत के किसी भी कोने में चले जाइए, एक छोटी सी चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह आपको QR कोड चिपका हुआ मिलेगा। एक क्लिक, और पैसा ट्रांसफर। ग्राहक खुश क्योंकि कोई चार्ज नहीं, दुकानदार खुश क्योंकि छुट्टा देने का झंझट नहीं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि Google, Walmart (PhonePe की पैरेंट कंपनी) और Amazon जैसी दिग्गज कंपनियां बिना आपसे ₹1 लिए हज़ारों कर्मचारियों की सैलरी, सर्वर का खर्च और मार्केटिंग का करोड़ों रुपया कहाँ से निकाल रही हैं?

1. मर्चेंट इकोसिस्टम: साउंडबॉक्स और सब्सक्रिप्शन की ताकत
UPI पेमेंट भले ही फ्री हो, लेकिन दुकानदार को दी जाने वाली सुविधाएं फ्री नहीं हैं।
- साउंडबॉक्स (The Audio Revolution): आपने दुकानों पर “PhonePe पर 50 रुपये प्राप्त हुए” की आवाज सुनी होगी। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, कमाई की मशीन है। PhonePe और Paytm जैसी कंपनियां दुकानदारों से इसके लिए ₹100 से ₹150 प्रति माह का किराया वसूलती हैं।
- सब्स्क्रिप्शन मॉडल: देश में करोड़ों छोटे दुकानदार हैं। यदि 50 लाख दुकानदार भी ₹100 महीना देते हैं, तो यह सीधे ₹50 करोड़ महीने की कमाई है। इसमें कोई जटिलता नहीं, बस शुद्ध रेवेन्यू।
2. क्रॉस-सेलिंग: पेमेंट तो बस एक बहाना है
UPI इन कंपनियों के लिए ‘कस्टमर एक्विजिशन टूल’ (ग्राहक लाने का जरिया) है। असली खेल ऐप के अंदर मौजूद अन्य सेवाओं में है:
| सेवा | कमाई का जरिया |
| बीमा (Insurance) | बाइक, कार और स्वास्थ्य बीमा बेचने पर भारी कमीशन। |
| निवेश (Investments) | म्यूचुअल फंड और गोल्ड (Digital Gold) में निवेश पर ब्रोकरेज। |
| बिल पेमेंट | बिजली, पानी, और गैस बिल भुगतान पर ऑपरेटर से कमीशन। |
| मोबाइल रिचार्ज | टेलीकॉम कंपनियों से मिलने वाला 2-3% का फिक्स्ड कमीशन। |
3. डेटा: 21वीं सदी का नया सोना (Data as the New Oil)
Google Pay और PhonePe के पास आपका जो डेटा है, वह किसी भी बैंक से ज्यादा सटीक है।
- खर्च करने की आदत: आप कब, कहाँ और कितना खर्च करते हैं, यह इन कंपनियों को पता है।
- क्रेडिट स्कोरिंग: आपके ट्रांजेक्शन पैटर्न के आधार पर ये कंपनियां आपकी ‘क्रेडिट वर्थनेस’ (कर्ज चुकाने की क्षमता) तय करती हैं।
- टारगेटेड एडवरटाइजिंग: जो स्क्रैच कार्ड आपको मिलते हैं, वे दरअसल ब्रांड्स के विज्ञापन हैं। स्विगी या जोमैटो का कूपन मिलना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी मार्केटिंग डील है।
4. लेंडिंग (Lending): असली मुनाफा यहाँ है
बैंकिंग की दुनिया में सबसे ज्यादा पैसा ब्याज में है। Google Pay और PhonePe खुद बैंक नहीं हैं, लेकिन ये बैंकों के लिए ‘एजेंट’ का काम करते हैं।
- पर्सनल लोन: ऐप पर आपको अक्सर “Pre-approved Loan” के बैनर दिखते हैं। जब आप वहां से लोन लेते हैं, तो बैंक इन कंपनियों को लोन राशि का 1% से 3% तक कमीशन देता है।
- मर्चेंट लोन: दुकानदारों को उनके दैनिक ट्रांजेक्शन के आधार पर छोटे बिजनेस लोन दिए जाते हैं। इसमें जोखिम कम और मुनाफा ज्यादा होता है।

5. साफ्टवेयर एज ए सर्विस (SaaS) और मर्चेंट टूल्स
बड़ी कंपनियां दुकानदारों को सिर्फ पेमेंट की सुविधा नहीं देतीं, बल्कि उनका पूरा बिजनेस मैनेज करने के लिए सॉफ्टवेयर देती हैं:
- GST और अकाउंटिंग: छोटे व्यापारियों के लिए बिलिंग सॉफ्टवेयर।
- इन्वेंटरी मैनेजमेंट: क्या स्टॉक खत्म हो रहा है, इसकी जानकारी।
- प्रीमियम डैशबोर्ड: डेटा एनालिटिक्स देखने के लिए व्यापारियों से वसूला जाने वाला शुल्क।
6. भविष्य की रणनीति: क्रेडिट लाइन ऑन UPI
हाल ही में RBI ने UPI पर ‘क्रेडिट लाइन’ (उधार सीमा) की अनुमति दी है। अब तक आप अपने बैंक खाते से पैसे भेजते थे, अब आप ऐप से ‘उधार’ लेकर पेमेंट कर सकेंगे। इस पर लगने वाला ब्याज और प्रोसेसिंग फीस इन कंपनियों की कमाई को अगले 5 वर्षों में 10 गुना तक बढ़ा सकती है।
क्या यह मॉडल टिकाऊ है?
UPI पेमेंट का फ्री होना ग्राहकों के लिए एक वरदान है, लेकिन इन कंपनियों के लिए यह एक ‘हुक’ (Hook) है। एक बार जब आप इनके इकोसिस्टम में आ जाते हैं, तो वे आपको अपनी अन्य सेवाओं के जरिए मॉनिटाइज (मुद्रीकरण) करती हैं।
भारत का डिजिटल पेमेंट बाजार 2030 तक $10 ट्रिलियन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में Google Pay और PhonePe सिर्फ पेमेंट ऐप नहीं, बल्कि भविष्य के ‘डिजिटल फाइनेंशियल सुपरमार्केट’ हैं।